तुम ने जो झूठ कहकर धर्मी के मन को उदास किया है, यद्यपि मैं ने उसको उदास करना नहीं चाहा, और तुमने दुष्ट जन को हियाव बन्धाया है, ताकि वह अपने बुरे मार्ग से न फिरे और जीवित रहे।