वह वर्ष के अन्त में अपना सिर मुँड़ाता था। (उसके बाल उसको भारी जान पड़ते थे, इस कारण वह उसे मुँड़ाता था); और जब जब वह उसे मुँड़ाता तब तब अपने सिर के बाल तौलकर राजा के तौल के अनुसार दो सौ शेकेल भर पाता था।