పరిశుద్ధ గ్రంథము
,
पुराना नियम
,
नीतिवचन
,
अध्याय 20
,
వచనము 17
चोरी–छिपे की रोटी मनुष्य को मीठी तो लगती है, परन्तु बाद में उसका मुँह कंकड़ों से भर जाता है।
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